UP Diwas: जानें कब और कैसे United Province का नाम हुआ Uttar Pradesh
UP Diwas: जानें कब और कैसे United Province का नाम हुआ Uttar Pradesh

UP Diwas: How Uttar Pradesh Got Its Name: भारत देश का सबसे बड़ा राज्य, जो की अगले महीने अपना यहाँ विधान सभा चुनाव देखने को है,  आज उसका स्थापना दिवस है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं UP Diwas (Uttar Pradesh Diwas) की। मई 2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath (योगी आदित्यनाथ) ने यह ऐलान किया था की हर वर्ष 24 जनवरी के दिन को उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाएगा। आपको बता दें UP Diwas मनाने का सुझाव राज्य के पूर्व राज्यपाल Ram Naik (राम नाईक) जी द्वारा दिया गया था।

क्यों मनाया जाता है UP Diwas:

इतिहास के मुताबिक, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) 24 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया, जब भारत के गवर्नर-जनरल ने संयुक्त प्रांत यानि की यूनाइटेड प्रोविन्स (United Province) (नाम परिवर्तन) आदेश 1950 पारित किया, जिसमें संयुक्त प्रांत (United Province) का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश कर दिया गया। गवर्नर जनरल का आदेश 24 जनवरी 1950 के उत्तर प्रदेश गजट (असाधारण) में प्रकाशित हुआ था। इसलिए 24 जनवरी को UP Diwas (उत्तर प्रदेश) दिवस के रूप में जाना जाता है। 

आपको बता दें की यूनाइटेड प्रोविन्स (United Province) 1 अप्रैल 1937 को “आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत” (United Provinces of Agra and Oudh) को छोटा करने के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आया था। 

यूपी सरकार कीआधिकारिक मोहर:
यूपी सरकार की आधिकारिक मोहर:

कैसे United Province का नाम पड़ा Uttar Pradesh:

Gyanesh Kudaisya (ज्ञानेश कुदैस्य) द्वारा लिखी गई किताब Region, Nation, “Heartland”: Uttar Pradesh in India’s Body Politic (रीजन, नेशन, हार्टलैंड: उत्तर प्रदेश इन इंडियाज बॉडी पॉलिटिक) में एक दिलचस्प विवरण सामने आया है।

1902 से, प्रांत (Province) को आगरा (Agra) और अवध (Awadh) के संयुक्त प्रांत के रूप में जाना जाता था, जिसे 1937 में छोटा करके संयुक्त प्रांत या यूपी कर दिया गया। आज़ादी के कुछ दिनों के भीतर, यूपी विधायिका ने “उपयुक्त नाम” पर बहस शुरू कर दी। लगभग 20 नाम सामने आए लेकिन आम सहमति लंबे समय तक नहीं रही।

अक्टूबर 1949 में, मामले को और स्थगित नहीं किया जा सकता था क्योंकि नए संविधान का मसौदा तैयार होने वाला था और इसमें प्रांतों के नाम शामिल करने थे। मामला नवंबर 1949 में बनारस में हुई प्रांतीय कांग्रेस कमेटी के सामने रखा गया था। 106 सदस्यों के भारी बहुमत ने ‘आर्यवर्त’ के पक्ष में एक प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि ‘हिंद’ को 22 वोट मिले।

प्रमुख कांग्रेस नेता GB Pant (जीबी पंत) ने संविधान सभा को निर्णय से अवगत कराया जिसने इसे नकार दिया। 17 नवंबर 1949 को पंत सार्वजनिक रूप से बहस से मुकर गए। उन्होंने विधानसभा को सूचित किया कि आर्यव्रत प्रस्ताव को “देश के अन्य हिस्सों में स्वीकार्य नहीं पाया गया” के रूप में दिया जा रहा है।

मध्य प्रांत-बरार के सदस्य आरके सिधवा (R.K. Sidhwa) को डर था कि संयुक्त प्रांत भारत के नाम पर एकाधिकार करने के लिए उत्सुक है। इसके अलावा, उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यद्यपि आर्यावर्त नाम दिया गया हो सकता है, संयुक्त प्रांत सरकार अभी भी इसके बजाय हिंदुस्तान नाम को आगे बढ़ा सकती है।

सिधवा ने आरोप लगाया की इस तरह के नाम “न केवल संयुक्त प्रांत बल्कि पूरे भारत को दर्शाता है।” वह चिंतित थे कि संयुक्त प्रांत खुद को “भारत का सबसे बड़ा प्रांत” के रूप में देखता था।

इस तरह की चिंता को दूर करने के लिए, केंद्रीय कानून मंत्री, डॉ बीआर अंबेडकर (Dr. B.R. Ambedkar) ने एक विधेयक पेश किया, जिसे 25 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था, जिसमें गवर्नर जनरल को यूनियन से मिलकर प्रांतों के नाम बदलने का अधिकार दिया गया था। पंत ने वादा किया कि आर्यावर्त या हिंदुस्तान जैसे नाम “फिर से नहीं सुझाए जाएंगे”

इस प्रकार, कुदैस्य के अनुसार, संयुक्त प्रांत का नाम आर्यावर्त के रूप में बदलने के लिए, केंद्रीय नेतृत्व द्वारा समय पर हस्तक्षेप करके अपने ट्रैक में रोक दिया गया था। इसके बाद, यूपी से संविधान सभा के कांग्रेस सदस्यों की एक बैठक बुलाई गई जिसमे “उत्तर प्रदेश” नाम पर समझौता तय हुआ। 


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Faraaz
Journalism Student | iamfhkhan@gmail.com | + posts

Faraaz is pursuing Mass Communication & Journalism from BBD University Lucknow.