भारत में मास्टोडॉन (Mastodon) हाल ही में तेजी से प्रचलित माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट (Microblogging website) के रूप में उभरा है. इस प्लेटफॉर्म पर भारतीय तेजी जुड़ रहे हैं. ऐसे में लोग सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर (Twitter) छोड़ मास्टोडॉन पर अकाउंट बना रहे है, जो बिल्कुल ट्विटर की तरह है. इसका इस्तेमाल यूजर्स अपनी प्रोफाइल बनाने के साथ-साथ इमेज पोस्ट करने, संदेश और वीडियों को शेयर करने में करते हैं.

दिखने मे यह प्लेटफॉर्म लगभग ट्विटर जैसा ही है लेकिन मौलिक रूप से ये बिलकुल अलग तरीके से काम करता है.

क्या है मास्टोडॉन ?

 

मास्टोडॉन एक जर्मनी बेस्ड ओपन सोर्स सोशल नेटवर्किंग साइट है. मास्टोडॉन हाथी की तरह दिखने वाला एक विशाल प्राणी था जो पृथ्वी से विलुप्त हो चुका है. इसी जीव के ऊपर ही इसका नाम मास्टोडॉन रखा गया है. मास्टोडॉन की स्थापना 5 अक्टूबर 2016 में यूगेन रोचको द्वारा की गई.

मास्टोडॉन पर पोस्ट लिखने के लिए 500 कैरेक्टर (Character count) की लिमिट मिलती है. जबकि ट्विटर पर यह कैरेटर लिमिट 280 है। जहाँ ट्विटर पर हम किसी पोस्ट को ‘ट्वीट’ (Tweet) कहते हैं तो वही मास्टोडॉन के पोस्ट को हम ‘टूट’ (Toot) कहते हैं.

खुद कर सकते हैं अपना अकाउंट वेरिफाई.

मास्टोडॉन पर यूजर्स अपना अकाउंट खुद वेरिफाई (Verify) कर सकते हैं. इस प्लेटफॉर्म पर ट्विटर की तरह अकाउंट वेरिफाई करने के लिए हाई-प्रोफाइल सख्शियत होना जरूरी नहीं है. पिछले दिनों भारत में ट्विटर पर अकाउंट वेरिफाई करने और अकाउंट सस्पेंड करने को लेकर भेदभाव का आरोप लगा.

इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने ट्विटर से मास्टोडॉन की तरफ रूख़ किया है. ट्विटर पर भेदभाव के चलते सुप्रीम कोर्ट के वकील संजय हेगड़े और ओबीसी नेता दिलीप मंडल का अकाउंट सस्पेंड करने का भी आरोप है.

20,000 भी ज़्यादा लोगों ने छोड़ा ट्विटर

पिछले हफ्ते 20,000 से भी ज़्यादा लोगों ने ट्विटर छोड़ मास्टोडॉन पर अकाउंट बनाया, जिसकी पिछले हफ्ते कर साप्ताहिक ग्रोथ 1000 थी. मास्टोडॉन छेड़छाड़ और हेट स्पीच के पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई के मजबूत टूल्स प्रदान करता है. मास्टोडॉन ट्विटर की तरह यूजर्स का डाटा नहीं कलेक्ट करता है.