समय पर न्याय ना मिलने के कारण ही आज ट्विटर पर हैश्टैग #JusticeforSugaliPreethi ट्रेंड कर रहा है. यह ट्रेंड ट्विटर पर नम्बर एक के पायदान पर बना हुआ है.

क्या है पूरा मामला ?

यह घटना 19 अगस्त, 2017 की है, जब कुरनूल शहर के बाहरी इलाके में स्थित कट्टमन्ची रामलिंगा रेड्डी आवासीय उच्च विद्यालय में अपने छात्रावास के कमरे में कक्षा 10 की 15 वर्षीय छात्रा गीता (बदला हुआ नाम) को रहस्यमय परिस्थितियों में सुबह 11 बजे मृत पाया गया. उस दिन माता-पिता को एक कॉल आया, उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी अस्वस्थ थी, उन्हें स्कूल आने और बेटी को अस्पताल ले जाने के लिए कहा गया. स्कूल पहुंचने पर, राजू अपनी बेटी के मृत शरीर को देखकर हैरान रह गए.

“हर माता-पिता सोचते हैं कि स्कूल बच्चों के लिए एक सुरक्षित स्थान है, लेकिन एक बच्चे को शिक्षा प्रदान करने के बदले में उसे बलात्कार करके मार डालना कितना अमानवीय है?” सुगाली राजू नाइक (35) गुस्से में पूछते है.

राजू और उनकी पत्नी पार्वती देवी के लिए, पिछले दो वर्षों में, अपनी 15 वर्षीय बेटी गीता के बारे में सोचे बिना, एक दिन भी नहीं गुज़रता. जिसका आंध्र प्रदेश के कुरनूल में मारे जाने से पहले कथित रूप से बलात्कार किया गया था.

19 अगस्त को जब राजू स्कूल पहुंचा, तो पुलिस पहले से ही वहां मौजूद थी. स्कूल ने उसे बताया कि उसकी बेटी अपने पीरियड्स पर थी, और उसने अपने हॉस्टल के कमरे में फाँसी लगाये जाने से पहले खुद क्लास से निकल गयी थी. प्रबंधन ने दावा किया कि वह उदास थी और उसने खुद को मार डाला था. लेकिन राजू इस दावे को स्वीकारने से इनकार कर दिया.

गीता ने अपने माता-पिता से दो पुरुषों द्वारा उत्पीड़न के बारे में पहले शिकायत की थी. उसने उन्हें बताया था कि स्कूल के संवाददाता वालापुरेड्डी जनार्दन रेड्डी के बेटे हर्षवर्धन रेड्डी (43) और दिवाकर रेड्डी (41) ने रात में उसे परेशान किया, इस कारण वह हॉस्टल में नहीं रहना चाहती थी. माता-पिता 20 अगस्त को इस मुद्दे के बारे में प्रबंधन से संपर्क करने की योजना बना रहे थे – लेकिन उनकी बेटी 19 अगस्त इस दुनिया को अलविदा कह चुकी थी.

माता-पिता की शिकायत पर, कुरनूल पुलिस ने जनार्दन रेड्डी और उनके दो बेटों के खिलाफ आईपीसी धारा 302 (हत्या), 201 (साक्ष्य मिटाने के कारण) r / w 34 (कई व्यक्तियों द्वारा किया गया कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया; एससी / एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3 (2) (v) (गीता एक एसटी समुदाय से है); और, यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण की धारा 10 (POCSO) अधिनियम, 2012 मुक़दमा दर्ज किया.

लेकिन यौन उत्पीड़न के शुरुआती मामले के बावजूद, मामला पटरी से उतर गया, हालांकि फोरेंसिक सबूतों से पता चला कि पीड़ित के निजी अंगों में शुक्राणु मौजूद थे.

हाल ही में पीड़िता के माता-पिता की अभिनेता-राजनेता और जन सेना प्रमुख पवन कल्याण से मुलाकात हुई थी. पीड़ित के माता-पिता ने आंध्र के गृह मंत्री और राज्य पुलिस अधिकारियों पर जांच में चूक का आरोप भी लगाया.

इसके बाद, सरकार ने अब एक नई जांच शुरुआत की और अतिरिक्त एसपी रामादेवी की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) नियुक्त किया. जांच अदालत की अनुमति से हो रही है, और पुलिस न्यायायिक प्रक्रिया के बाद एक नई चार्जशीट दाखिल कर सकती है.

आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौतम सवांग ने कहा, “कुछ विसंगतियों के मद्देनजर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था, जिसे इंगित किया गया है और कुछ शिकायतें प्राप्त हुई हैं. यदि कुछ भी सामने आता है, तो हम इसे अदालत में पेश करेंगे। ‘

दो साल गुज़रने के बाद भी, न्याय के लिए उनकी लड़ाई जारी है. नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के सबूतों के बावजूद, जांचकर्ताओं और कई अन्य लोग इस कार्यवाही को टालने और बदलने के इरादे से लगे हुए हैं. ऐसा आरोप गीता के माता-पिता ने लगाया है.