जेएनयू से पढ़े अभिजीत को मिला नोबेल पुरूस्कार

अभिजीत बनर्जी के ही एक अध्ययन पर भारत में विकलांग बच्चों की स्कूली शिक्षा की व्यवस्था को बेहतर बनाया गया, जिसमें क़रीब 50 लाख बच्चों को फ़ायदा पहुंचा है.

इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार भारतीय मूल के अमरीकी इकॉनामिस्ट अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्‍नी को दिया गया है. अभिजीत और डूफलो के साथ माइकल क्रेमर को भी संयुक्त रूप से ये सम्मान देने की घोषणा की गई.

इन तीनों को यह पुरस्‍कार दुनिया से गरीबी दूर करने के बारे में उनके प्रयोगात्‍मक दृष्टिकोण पर काम के लिए दिया गया है.

नोबेल कमेटी ने कहा है, इन लोगों ने विश्‍व में गरीबी से संघर्ष की क्षमता को बढ़ाने में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है. सिर्फ दो दशक में परीक्षण पर आधारित उनके नए दृष्टिकोण से विकासात्‍मक अर्थव्‍यवस्‍था में आमूल परिवर्तन आया है.

वर्ष 2003 में अभिजीत बैनर्जी ने पत्‍नी ड्यूफ्लो और सेंथिल मुल्‍लईनाथन के साथ मिलकर अब्‍दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्‍शन लैब की स्‍थापना की और इस समय वे इसके निदेशकों में से एक हैं.

अभिजीत बनर्जी की पत्नी इश्तर डूफलो अर्थशास्त्र में नोबेल जीतने वाली सबसे कम उम्र की महिला हैं. अर्थशास्त्र में नोबेल जीतने वाली वे महज दूसरी महिला बन गयी हैं.

“महिलाएं भी कामयाब हो सकती हैं ये देखकर कई महिलाओं को प्रेरणा मिलेगी और कई पुरुष औरतों को उनका सम्मान दे पाएंगे,” डूफेलो ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा है.

अट्ठावन साल के अभिजीत की शिक्षा भारत में कोलकाता यूनिवर्सिटी और दिल्‍ली के जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय में हुई है. इसके बाद उन्‍होंने हॉरवर्ड विश्‍वविद्यालय से 1988 में पी एच डी की डिग्री हासिल की.

अभिजीत बनर्जी के ही एक अध्ययन पर भारत में विकलांग बच्चों की स्कूली शिक्षा की व्यवस्था को बेहतर बनाया गया, जिसमें क़रीब 50 लाख बच्चों को फ़ायदा पहुंचा है.

अभिजीत की माँ, निर्मला बनर्जी ने कहा, “मैं बहुत खुश हूँ.” यह पूरे परिवार के लिए एक बड़ा गौरव है.