Aurangabad Train Accident: मौत से पहले मजदूरों से वसूली थी रोटी की कीमत

राजनीतिक ज़ंजीरों में जकड़े अपने ज़मीर को अगर आज़ाद कर सको तो पूछना ज़रूर कि ये जो लाचारी और मजबूरी का झोला उठाये (जिसमें चंद रोटियाँ हैं) मज़दूर ख़ौफ़-ए-भुखमरी की वजह से कूच कर चुके थे. उनको क्या मालूम था कि चंद रोटियों के टुकड़ों के चक्कर में ख़ुद के टुकड़े करा बैठेंगे.

Aurangabad Train Accident: सच कहा तुमने रेल की पटरियाँ सोने के लिए नही बनी हैं. उस पर कोई सो भी कैसे सकता है. दिन भर की तपती धूप से गरम पटरी, नीचे नुकीले पत्थर अगल-बगल मल-मूत्र की बदबू. कोई कैसे सो सकता है….ज़रा सोच कर देखिए.

मौत से पहले मजदूरों से वसूली थी रोटी की कीमत (Aurangabad Train Accident)

दैनिक जागरण में छपी एक खबर के अनुसार, जान गंवाने वाले एक मजदूर नेमशाह की पत्नी देववती ने आरोप लगाया है की जालना स्थित स्टील फैक्ट्री के ठेकेदार ने मौत (Aurangabad Train Accident) से पहले मज़दूरों से रोटी की कीमत तक वसूली थी, जो उसने उन्हें कुछ दिनों तक खिलाई थी.

राजनीतिक ज़ंजीरों में जकड़े अपने ज़मीर को अगर आज़ाद कर सको तो पूछना ज़रूर कि ये जो लाचारी और मजबूरी का झोला उठाये (जिसमें चंद रोटियाँ हैं) मज़दूर ख़ौफ़-ए-भुखमरी की वजह से कूच कर चुके थे. उनको क्या मालूम था कि चंद रोटियों के टुकड़ों के चक्कर में ख़ुद के टुकड़े करा बैठेंगे.

राजनीतिक मदिरा का सेवन हम ने इतना ज़्यादा कर लिया है जिसकी वजह से हमारे अंदर का हैवन बहुत ताक़तवर हो गया है और उस ताक़तवर हैवान ने हमारे अंदर किसी कोने में दुबकी इंसायित का गला घोंट कर क़त्ल कर दिया है.

और ये जो सवाल आप घर की छत के नीचे आराम से बैठ कर पूछ रहें हैं. जहाँ बाहर की चिल-चिलाती धूप आप तक आने की कोशिश तो कर रही है मगर सफलता हासिल नहीं कर पा रही है और बची कुची कसर कमरे मे लगा ए.सी. पूरी कर देता है. सोफ़े पे बैठकर चाये की चूसकियों का आनंद लेते हुवे आप पूछ रहें हैं कि-

वो पटरी पर क्यों सोयें, रेल की पटरी पर कौन सोता है?

तमाम इंतेज़ामात के बाद भी वो खाने की तलाश में बाहर क्यों निकले?

वो पैदल क्यों निकल पड़े?

तो इन सारे सवालों के जवाब है हमारे खुद के पास हैं. दोबारा फिर सोचियेगा की हम पूछ क्या रहें हैं.

जहाँ घर परिवार वाले एक तरफ़ रोटी के टुकड़ों की आस लगाये बैठें हो और उन्हें रोटी कमाने वालों के टुकड़े देखने पड़े तो ज़रा सोचियेगा…अरे हाँ आपकी सोच तो उस घटिया राजनीति की ग़ुलाम है जिसे चंद लोगों का मर जाना बस एक ख़बर मात्र लगती है.

इतना पढ़ने के बाद ज़रा एक बार और अपने अंदर टटोल कर देखिए शायद आख़री साँसे गिन रही इंसानियत बची हो. और अगर ना मिले तो आपका सवाल पूछना बनता हैं.

जानें क्‍या था Aurangabad Train Accident का पूरा मामला

औरंगाबाद से 35 किलोमीटर पैदल सफर तय करने के बाद मज़दूरों के पाँव दुखने लगे तो रेल की पटरियों पर आराम करने लगे. थकान की वजह से उनकी आँख लग गई और इसी दौरान मालगाड़ी पटरियों पर सो रहे मजदूरों के ऊपर से निकल गई (Aurangabad Train Accident).

मध्‍य प्रदेश के शहडोल-उमरिया के 16 लोगों की मौत हो गई. वह महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश स्थित अपने-अपने घर पैदल ही आ रहे थे. थक जाने पर पटरियों पर ही सो गए थे.

और अब सरकार द्वारा स्पेशल ट्रेन के ज़रिए उनके टुकड़े उनके घर वालों तक पहुचाए जाएँगे. मगर उन्हे तो बस अपने घर जाना था.

हाैसलों से भरे, तुम्हारे इस अधूरे सफ़र को हम कभी भुला कर भी नहीं भुला पायेंगे.

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