दिल्ली में ठंड ने 119 वर्षों का रिकोर्ड तोड़ा, मगर शाहीन बाग़ की महिलाओं का हौसला नहीं

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तेरे माथे पे ये आँचल बहुत ही खूब है लेकिन
तू इस आँचल से एक परचम बना लेती तो अच्छा था।

असरारुल हक़ “मजाज़” उर्फ़ मजाज़ लखनवी की ये पंक्तियाँ दिल्ली की जमा देने वाली ठंडक में शांतिपूर्ण धरने पर बैठी उन महिलाओं का बख़ूबी चरितार्थ करती हैं.

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मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में दिसंबर के महीने की ठंड पिछले 119 वर्षों का रिकोर्ड तोड़ सकती है. बेशक दिल्ली की सर्दी पिछले 119 वर्षों का रिकोर्ड तोड़ सकती है, मगर शाहीन बाग़ की महिलाओं का हौसला नहीं. जिस ठंड में हम और आप रूम हीटर तो क्या अपनी रज़ाई (कंबल) छोड़ कर बाहर नहीं निकलना चाहते, वहाँ शाहीन बाग़ की महिलायें अपना घर छोड़ कर खुली सड़कों पर खुले आसमान के नीचे बैठीं हैं. वो संग-दिल सरकार और जानलेवा ठंड से पिछले दो-हफ़्तों से लोहा ले रहीं हैं.

चार डिग्री से भी कम पारा साथ में शीत लहरों का प्रकोप भी मिलकर दिल्ली के शाहीनबाग़ इलाक़े की महिलाओं का हौसला नहीं तोड़ पा रहीं है. ये महिलायें पिछले 15-दिनों से कालिंदी कुंज जाने वाली सड़क पर धरने पर बैठी हैं. नोएडा-कालिंदी कुंज हाईवे के बीचों-बीच टेंट लगा कर गृहिणियों के नेतृत्व में बच्चे, बूढ़े और प्रदर्शनकारी भी साथ सड़क पर अनिश्चितक़ालीन प्रदर्शन पर बैठे हैं. जामिया में हुई पुलिस बर्बरता के बाद से ही ये महिलाएँ धरने पर बैठ गयीं.

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अगर हम बीमार पड़ते हैं या मर जाते हैं या अगर पुलिस हमें मारने आती है तो हमें इसकी परवाह नहीं है. जब तक CAA को वापस नहीं लिया जाता, हम यहां से नहीं जाएंगे. हम अपने संविधान को बचाने के लिए यहां शांतिपूर्ण तरीक़े से अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. हम सरकार के सभी क़ानूनों का सम्मान करते हैं. और अगर जनता को कोई क़ानून नहीं पसंद आ रहा तो सरकार को भी चाहिये कि वो जनता की सुने और सम्मान करे.

सरकार चाहती है कि हम साबित करें कि यह हमारा घर है. यदि हम चाहें, तो हम उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कागजात दिखा सकते हैं. लेकिन ऐसे लाखों लोग होंगे जो आवश्यक दस्तावेजों को पेश करने में सक्षम नहीं होंगे. इसलिए यह लड़ाई उन लोगों के लिए है. यहाँ पर जानलेवा ठंड है, लेकिन डिटेंशन केंद्रों की स्थितियों (जिनका हमें सामना करना पड़ सकता है) के बारे में सोचकर, हम यह विरोध जारी रख रहे हैं, स्थानीय लोगों का कहना है.

नागरिकता क़ानून (Citizenship Amendment Act) और राष्ट्रीय नाग्रिक रजिस्टर (National Register of Citizens) के विरोध में बैठी महिलाओं का कहना है कि, जब तक केंद्र सरकार इस संविधान और देश विरोधी क़ानून को वापस नहीं लेती तब तक हम यहाँ से नहीं हटेंगे. केंद्र सरकार धर्म के आधार पर लोगों को बांटना चाहती है.

कंपकंपाती ठंड में चाय परोसने से लेकर भोजन तक की व्यवस्था कुछ स्वयंसेवकों के एक दल द्वारा लगातार की जा रही है. बीते शनिवार से, डॉक्टरों, नर्सों और चिकित्सा स्वयंसेवकों के एक समूह द्वारा एक स्वास्थ्य शिविर भी स्थापित किया गया था, ताकि जरूरतमंद लोगों को बुनियादी चिकित्सा सहायता प्रदान की जा सके.

उल्लेखनीय है कि शाहीनबाग़ की चालीस फुटा रोड पर कई बड़े-बड़े ब्रैंड्ज़ के शोरूम और दुकाने हैं. रोड ब्लाक होने के साथ-साथ वहाँ के व्यापारियों की आमदनी पर भी रोक लग गयी है. सर्दियों के दौरान उनकी सहलाक का समय होता है जब ज्यादातर लोग खरीदारी करने आते हैं.

लोगों की आमदनी का नुक़सान होने के सवाल पर उनका कहना है कि ये क़ानून पूरी तरह से आसंवैधानिक है और देश विरोधी है. और प्रस्तावित एन॰आर॰सी॰ (NRC) को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि जब हम इस देश से ही निकाल दिये जायेंगे तो कैसा बिज़नेस और उस आमदनी का हम क्या करेंगे.

केंद्र सरकार पर आरोप लगते हुए लोगों ने कहा, कि ग्रह मंत्री अमित शाह एक ओर संसद में दावे से कहते हैं कि हम एन॰आर॰सी॰ लाएँगे तो दूसरी ओर देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी राम लीला मैदान से कहते हैं कि कोई एन॰आर॰सी॰ नहीं की जाएगी. समझ में नहीं आ रहा कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ?

हालाँकि, एक नोटिस विरोध स्थल के पास चिपकाया गया है जिसमें प्रदर्शनकारियों को तत्काल प्रभाव से प्रदर्शन रोकने के लिए कहा गया है. जिसे क्षेत्र के SHO द्वारा हस्ताक्षरित भी किया गया है. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने तब तक हटने से मना किया है जब तक उनकी माँगों को पूरी करने का लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता.

इस बीच, बीते रविवार की शाम जामिया मिलिया इस्लामिया में विरोध प्रदर्शन करने वाले आस-पास के क्षेत्रों के लोगों के साथ-साथ हज़ारों की संख्या में लोग यहां एकत्र हुए थे.

बॉलीवुड अभिनेता जीशान अय्यूब, जो शुरू से ही जामिया के छात्रों के साथ खड़े हैं उन्होंने सभी महिलाओं का हौसलाफ़ज़ाइ की. जीशान ने लोगों से धरने को शांतिपूर्ण बनाये रखने का निवेदन किया. और साथ ही ऐसे लोगों से दूर रहने को कहा जो इस जन-आंदोलन को सियासी रंग देने की कोशिश कर रहे हैं.

Image tweeted by Imran Pratapgarhi

तो वहीं एहतेजाज का हिस्सा बने शायर इमरान प्रतापगड़ी ने कुछ शायराना अन्दाज़ में वहाँ की महिलाओं का हौसला बुलंद किया. उन्होंने कहा-

जिनके नीचे जन्नत है इन पॉंवों को मेरा सलाम,

सर पर छाई कुहरे वाली छॉंओं को मेरा सलाम !

आने वाली नस्लों को इन पर नाज़ रहेगा सदियों तक

शाहीन बाग़ की बहनों को मॉंओं को मेरा सलाम !!

नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ देशव्यापी स्तर पर विरोध प्रदर्शन चल रहे है. दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, बिजनौर जैसे कई शहरों में ये प्रदर्शन हिंसक भी हुआ, जिसपर सुर्खियां बनी. और इसी हिंसा का सरकार विरोध कर रही हैं और आम जनता से CAA-NRC पर अफवाह ना मानने की बात कह रही हैं. लेकिन भारत में ऐसे कई क्षेत्र भी हैं, जहां बीते कई दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन जारी है. जिसे ना मीडिया देख पा रही है और ना शायद सरकार, जो सुर्खियों से परे है. इनमें से ही एक प्रदर्शन है दिल्ली के शाहीन बाग इलाक़े का.