Sakibul Gani became the first to score a triple century on first-class debut
Sakibul Gani became the first to score a triple century on first-class debut

Sakibul Gani Makes World Record in Ranji Trophy Match: यूं तो अक्सर पूरे विश्व में कोई न कोई क्रिकेट(Cricket) मैच कहीं न कहीं होता ही रहता है, और हर मैच के साथ नए रिकार्ड(Record) बनते और पुराने रिकार्ड टूटते भी रहते हैं। इसी क्रम में गुरुवार 17 फ़रवरी को क्रिकेट में एक और रिकार्ड बना है और ये रिकार्ड कोई ऐसा वैसा नहीं, बल्कि डेब्यू मैच में ही तिहरा शतक जड़ने का है। और ये कमाल किया है बिहार (Bihar) के मोतीहारी (Motihari) के रहने वाले Sakibul Gani (साकिबुल गनी) ने। Sakibul Gani (साकिबुल गनी) ने रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) में अपने फर्स्ट क्लास करिअर के डेब्यू मैच में ही 341 रन ठोक कर विश्व रिकार्ड स्थापित कर दिया। आपको बता दें इससे पहले विश्व के किसी भी खिलाड़ी ने अपने डेब्यू मैच में 300 रनों की पारी नहीं खेली है, चाहे वो घरेलु मैच हो या अंतर्राष्ट्रीय।

इससे पहले भी यह रिकार्ड एक भारतीय, Ajay Rohera (अजय रोहेरा) के नाम था, जिन्होंने मध्य प्रदेश की टीम से खेलते हुए हैदराबाद के खिलाफ 2018-19 में रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) में 267 रन बनाए थे।

मिज़ोरम की टीम के खिलाफ Ranji Trophy के मैच में Sakibul Gani ने करा यह करिश्मा:

गुरुवार 17 फरवरी से रणजी ट्रॉफी सीजन 2021-22 शुरू हो गया है और सीज़न के पहले दिन अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane), सरफराज़ खान (Sarfaraz Khan), यश धुल (Yash Dhull) जैसे खिलाड़ियों का जलवा रहा लेकिन दूसरे दिन का पूरा धूम धड़ाका रहा Sakibul Gani (साकिबुल गनी) के नाम। कोलकाता में रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) के प्लेट ग्रुप का ओपनिंग मुकाबला खेला जा रहा है जिसमें बिहार (Bihar) का सामना मिज़ोरम (Mizoram) से हो रहा है। मैच में बिहार ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला किया, लेकिन टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। पारी के दूसरे ओवर में ही ओपनर मंगल महरुर (Mangal Mehrur) आउट हो गए, जिसके बाद यशस्वी रिशव (Yashashvi Rishav) के साथ लखन राजा (Lakhan Raja) ने टीम को संभालने की कोशिश करी, लेकिन असफल रहे। लखन राजा के 25 रन पर आउट होने के बाद क्रीज़ पर आए नए नवेले 22 वर्षीय साकिबुल गनी।

सबसे पहले साकिबुल ने बिहार की गिरती हुई पारी को मज़बूती दी और संभाला। गनी ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए 405 गेंदे खेलकर 341 रन अपने बल्ले से जड़े। इनमें 56 चौकों के साथ 2 छक्के शामिल रहे। इस दौरान साकिबुल और बाबुल कुमार (Babul Kumar) के बीच चौथे विकेट के लिए 538 रनों की सफल साझेदारी भी हुई। आपको बता दें की यह इंडिया के फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पांचवीं 500 प्लस रनों की साझेदारी रही और साथ में इंडियन क्रिकेट की चौथी सबसे बड़ी पार्टनरशिप भी रही। गनी, जहाँ 341 रन बनाकर आउट हुए तो बाबुल 229 रन पर नाबाद रहे।

मौजूदा टूर्नामेंट की बात करें तो साकीब की पारी की बदौलत मिज़ोरम के खिलाफ अपनी पहली पारी में बिहार ने 5 विकेट पर 686 रन बनाए जिसके बाद टीम ने पारी की समाप्ति की घोषणा कर दी है। तो वहीं, मिज़ोरम ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक 3 विकेट के नुकसान पर 40 रन बना लिए हैं।

माँ ने कहा, “तीन बैट दे रही हूँ, तीन शतक लगाना”:

अपने बेटे साकिबुल गनी के इस मुकाम पर पहुँचने पर उनकी माँ अजमा खातून (Ajma Khatoon) ने कहा की, क्रिकेट के प्रति उसके मन में बचपन से ही लगाव और जोश था। कहते हैं किसी समय में साकिबुल के पास बैट के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे तो उनकी माँ ने अपने गहने गिरवी रख कर तीन बैट खरीदे थे। सकीबुल की मां ने बताया कि परिवार में इसकी जानकारी किसी को भी नहीं थी। सकीबुल का बैट देते हुए उनकी मां ने कहा था,

जा.. बेटा तीन बैट दे रही हूं । तीन शतक लगाकर आना।

Sakibul ने बड़े भाई से सीखे क्रिकेट के गुर:

साकिबुल के यहाँ तक पहुँचने में उनके बड़े भाई फैसल गनी (Faisal Gani) का बहुत बड़ा योगदान रहा है। 2009-10 में कूच बहार ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट खेल चुके फैसल ने साकिबुल को बचपन से क्रिकेट के गुर सिखाए और उनका हुनर निखारा। Indian Express से बातचीत के दौरान फैसल ने बताया की,

मैं खुद क्रिकेटर हूं। मैंने 2009-10 में बिहार एसोसिएट टीम के साथ कूच बिहार (अंडर-19) ट्रॉफी खेली। इसके बाद, मैंने विज्जी ट्रॉफी में ईस्ट जोन की कप्तानी की, लेकिन मैंने क्रिकेट छोड़ दिया क्योंकि बिहार में इसका कोई भविष्य नहीं था। 

फैसल ने आगे बताया की,

यहां तक ​​कि जब मैंने क्रिकेट खेलना बंद कर दिया, तब भी  मैंने सुनिश्चित किया कि साकिब एक भी प्रशिक्षण सत्र (Training session) को नहीं छोड़ेंगे। मैंने तय किया था कि मैं उसे रांची भेजूंगा ताकि वह झारखंड के लिए खेल सके। 

आपको यह भी बता दें की साकीब अपने 4 भाइयों में सबसे छोटे हैं और उनके सभी भाई किसी न किसी स्तर पर क्रिकेट खेल चुके हैं। अपने बेटे की इस सफलता के बाद साकीब के पिता मनान गनी (Manan Gani) ने बताया की उनके बेटे ने पूरे मोतीहारी का नाम रोशन कर दिया और वो चाहते हैं उनका बेटा और आगे बढ़े और एक दिन भारतीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए भी खेले।

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faraz
Faraaz
Journalism Student | iamfhkhan@gmail.com | + posts

Faraaz is pursuing Mass Communication & Journalism from BBD University Lucknow.