महाराष्ट्र (Maharashtra) का सियासी दांव पलट चुका है. उद्धव ठाकरे (Udhav Thackeray) होंगे राज्य के नए सीएम. मंगलवार दोपहर बाद देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. वो मात्र 4-दिन ही सीएम रह पाए. प्रोटेम स्पीकर कालिदास कोलंबकर (Kalidas Kolambkar) बुधवार सुबह 8:00 बजे विधायकों को शपथ दिलाएंगे.

राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे (Udhav Thackeray) को सरकार बनाने का न्योता दिया है. 28 नवंबर को शिवाजी पार्क (Shivaji Park) में शाम 6:40 बजे शपथ ग्रहण करेंगे. सरकार को 3 दिसंबर तक बहुमत साबित करने का समय दिया गया है.

महाराष्ट्र की राजनीति मे चल रहे दंगल को विराम देने के लिए उच्चतम नयायालय ने महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट (floor test) कराने का फैसला दिया, तो वहीं अब महाराष्ट्र का सियासी ड्रामा अपने क्लाइमेक्स की ओर बढ़ता नजर आ रहा है. सरकार किस की बनेगी किस की नहीं ये तस्वीर जल्दी ही साफ हो जाएगी, लेकिन सरकार किस तरह से बनेगी ये बात एक दम क्लियर हो चुकी है.

अब जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने फ्लोर टेस्ट कराने का फैसला दे दिया है तो एक नजर डालते है फ्लोर टेस्ट के भौकाल पर, जिसे पास कर पार्टी सत्ता में आ जाती है और फेल होने पर विपक्ष की कुर्सी तोड़ती नजर आती है यानि विपक्ष का रोल अदा करती है.

क्या है फ्लोर टेस्ट ?

फ्लोर टेस्ट यानि शक्ति प्रदर्शन की वह प्रक्रिया जिसमें सरकार विधानसभा में अपना विश्वासमत साबित करती है. इस प्रक्रिया में राज्यपाल की तरफ से नियुक्त मुंख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत साबित करना होता है. राज्यपाल ऐसा आदेश तब देता है जब सरकार बनाने वाली पार्टी के पास पर्याप्त बहुमत नही होता है.

इस प्रक्रिया में निर्वाचित विधायक प्रोटेम स्पीकर (Protem Speaker) के सामने अपनी पार्टी के लिए मतदान करते हैं.

कौन होता है प्रोटेम स्पीकर ?

प्रोटेम स्पीकर सदन का अस्थायी स्पीकर होता है जो चुनाव के बाद सदन की पहली बैठक की अध्यक्षता करता है. प्रोमेट स्पीकर को स्थायी स्पीकर चुने जाने तक सदन के संचालन के लिए विधानसभा के सदस्यों में से किसी एक को चुना जाता है. सामान्य तौर पर सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को इस पद के लिए चुना जाता है. मैच टाई होने की स्थिति या फिर कुछ विधायकों के वोटिंग के दौरान अनुपस्थिति होने की स्थिति में प्रोमेट स्पीकर को भी वोटिंग करने का अधिकार प्राप्त होता है.

कैसे होता है फ्लोर टेस्ट ?

फ्लोर टेस्ट प्रक्रिया तीन प्रकार की वोटिंग से कराई जा सकती है:

  1. व्यॉइस वोट (Voice Vote): व्य़ॉइस वोट में विधायक को मौखिक तौर पर जवाब देना होता है.
  2. डिविजन वोट (Division Vote): डिविजन वोट में, वोटिंग इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स स्लिप्स या फिर बैलेट बॉक्स का प्रयोग होता है.
  3. बैलेट बॉक्स (Ballot Box): बैलेट बॉक्स, आमतौर पर सीक्रट वोटिंग यानी गुप्त मतदान के तौर पर जाना जाता है. लेकिन महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट के दौरान होने वाली वोटिंग के शीर्ष अदालत ने गुप्त मतदान के लिए मना किया है.