Sudarshan TV UPSC Jihad: सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, कहा यह उन्माद पैदा करने वाला कार्यक्रम है

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, हम चिंतित हैं जब आप कहते हैं कि जामियामिलिया के विद्यार्थी सिविल सेवाओं में घुसपैठ करने के लिए एक समूह का हिस्सा हैं तो हम बर्दाश्त नहीं कर सकते.

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को सुदर्शन टीवी (Sudarshan TV) के शो ‘बिंदास बोल’ (Bindas Bol) के ‘नौकरशाही जिहाद’ (UPSC Jihad) नामक एपिसोड के प्रसारण पर रोक लगा दिया है. जिसमें कहा गया है कि प्रथम दृष्टि में यह कार्यक्रम “मुस्लिम समुदाय को कलंकित करता दिखाई देता है.

बता दें कि इस टीवी कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया गया था कि सरकारी सेवा में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की घुसपैठ की साजिश का पर्दाफाश किया जा रहा है.

चैनेल के एडिटर इन चीफ सुरेश चव्हाणके (Suresh Chavhanke) ने शुक्रवार 11 सितंबर को बिंदास बोल (Bindas bol) कार्यक्रम में ‘यूपीएससी जिहाद पर अब तक का सब बड़ा खुलासा’ नाम से एक शो किया. शो में इस बात पर चर्चा की गई कि सिविल सर्विसेज के एग्जाम का स्वरूप और काम करने तरीका ऐसा बनाया गया, जिससे मुस्लिम समुदाय (Muslim community) को फायदा पहुंचे.

अदालत ने सुदर्शन टीवी (Sudarshan TV) के इस कार्यक्रम को उन्माद पैदा करने वाला कार्यक्रम बताते हुए इसके प्रसारण पर रोक लगा दिया है. और मामले को 17 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया.

अदालत ने यह भी कहा कि हम एक पांच सदस्य कमिटी के गठन करने के पक्ष में है, जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कुछ निश्चित मानक तय कर सके.

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ (D Y Chandrachud), न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा (Indu Malhotra) और न्यायमूर्ति के एम जोसफ (K M Joseph) की पीठ ने कहा, इस कार्यक्रम को देखिये, कैसा उन्माद पैदा करने वाला यह कार्यक्रम है कि एक समुदाय प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश कर रहा है.

‘देखिये इस कार्यक्रम का विषय कितना उकसाने वाला है कि मुस्लिमों ने प्रशासनिक सेवाओं में घुसपैठ कर ली है और यह तथ्यों के बगैर ही यह संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं को संदेह के दायरे में ले आता है’, पीठ ने कहा.

सुदर्शन टीवी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान (Shyam Divan) ने पीठ से कहा कि चैनल इसे राष्ट्रहित में एक खोजी खबर मानता है. उन्होने कहा, ‘मैं इसे प्रेस की स्वतंत्रता के रूप में दृढ़ता से विरोध करूंगा. कोई पूर्व प्रसारण प्रतिबंध नहीं हो सकता है”.

इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, हम चिंतित हैं जब आप कहते हैं कि जामियामिलिया के विद्यार्थी सिविल सेवाओं में घुसपैठ करने के लिए एक समूह का हिस्सा हैं तो हम बर्दाश्त नहीं कर सकते.

देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme court) के रूप में हम आपको यह कहने की अनुमति नहीं दे सकते कि मुस्लिम नागरिक प्रशासनिक सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं. आप यह नहीं कह सकते कि पत्रकारों को यह करने की पूर्ण स्वतंत्रता है.

आपका मुवक्किल देश का अहित कर रहा है और यह स्वीकार नहीं कर रहा कि भारत विविधता भरी संस्कृति वाला देश है. आपके मुवक्किल को अपनी आजादी के अधिकार का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए.

शीर्ष अदालत ने सुदर्शन टीवी के नौकरशाही जिहाद कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए मंगलवार को कहा कि मीडिया में स्व नियंत्रण की व्यवस्था होनी चाहिए.

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