Citizenship Amendment Bill: लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित हो गया है. 311 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया और 80 सदस्यों ने इसका विरोध किया.

गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को यह विधेयक संसद में प्रस्‍तुत किया. लम्बी बहस चली इस विधेयक के तमाम फ़ायदे और नुक़सान पक्ष विपक्ष ने गिनाए. और अंत में देर रात ये विधेयक पारित हो गया.

क्या है नागरिकता संशोधन बिल ?

नागरिकता संशोधन विधेयक का उद्देश्य छह समुदायों- हिन्दू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध तथा पारसी लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है. बिल के ज़रिये मौजूदा कानूनों में संशोधन किया जाएगा, ताकि चुनिंदा वर्गों के गैरकानूनी प्रवासियों को छूट प्रदान की जा सके. चूंकि इस विधेयक में मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है, इसलिए विपक्ष ने बिल को भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए उसकी आलोचना की है.

अमित शाह ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक धार्मिक रूप से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का बिल है.

इस बिल ने किसी मुस्लिम के अधिकार नहीं लिए हैं. हमारे एक्ट के अनुसार कोई भी आवेदन कर सकता है. नियमों के अनुसार आवेदन करने वालों को नागरिकता दी जाएगी.

अरुणाचल, मिजोरम और नगालैंड की तरह मणिपुर को नागरिकता बिल से छूट मिलेगी.