15 अक्टूबर को जेएनयू छात्र नजीब अहमद के लापता हुए तीन साल होने जा रहे है. 14 अक्टूबर 2016 को उसके और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कुछ सदस्यों के बीच कथित तौर पर झगड़ा हुआ था.

जिसके बाद से नजीब अभी तक गायब है. हालांकि एबीवीपी ने इस मामले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है.

पिछले साल दिसंबर में बुलंदशहर में भीड़ द्वारा मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की पत्नी रजनी सिंह के साथ 3 अक्टूबर को प्रेस क्लब मे आयोजित एक कांफ्रेंस में फातिमा नफीस ने कहा कि वह रजनी के साथ 15 अक्टूबर (जिस तारीख पर 2016 में नजीब लापता हो गया था) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर तक मार्च का नेतृत्व करेंगी.

उन्होने ट्वीट कर कहा- “15 अक्टूबर को मैं नजीब की माँ, तबरेज़ की पत्नी, गौरी लंकेश की बहन, इंसपेक्टर सुबोध की पत्नी, साहिल की माँ, और तमाम पीड़ित परिवार के साथ अमित शाह के दिल्ली वाले घर को घेरा जाएगा. आप सभी से अपील है हमेशा की तरह इंसाफ की लड़ाई मे दिल्ली पहुचे और हम सबकी हिम्मत बने.”

फातिमा ने कहा, “मेरी सारी आर्थिक बचत खत्म हो गई है, लेकिन मेरा बच्चा अभी भी मेरे साथ नहीं है।” फातिमा तीन साल से विरोध प्रदर्शन कर रही हैं, और अक्टूबर 2017 में दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में भी लिया था जब वह दिल्ली उच्च न्यायालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रही थी.

शुक्रवार को उन्होने ट्वीट कर 15 अक्टूबर को 3 बजे, जंतर मंतर, पर किये जाने वेल विरोध प्रदर्शन मे लोगों से उनका साथ देने की अपील की.

नजीब की मां फातिमा नफीस का कहना है कि वह अपने बेटे की तलाश जारी रखेंगी और हार नही मानेंगी.