संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन जेएनयू (JNU) के छात्रों ने हाथो में तख्तियां लेकर हॉस्टल फीस वृद्धि के खिलाफ नारे लगाते हुए संसद भवन की ओर मार्च निकालने की कोशिश की. संसद के पास धारा 144 लागू होने के बावजूद छात्रों ने फीस वृद्धि के खिलाफ मार्च करना जारी रखा.

फीस वृद्धि के विरोध में, मार्च के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज के बाद कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गये. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वयराल हो रहा है जिसमे एक छात्र को पुलिस वाहन में जबरन ले जाते हुए देखा गया जिसके सिर से काफ़ी खून बह रहा था. इस बीच, आंदोलन के कई छात्र नेताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया.

जेएनयू छात्रसंघ (JNU Students Union) सचिव सतीश चन्द्र यादव (Satish Chandra Yadav) ने कहा, पुलिस छात्रसंघ के पदाधिकारियों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD Ministry) के सचिव से मिलवाने ले जा रही थी. इस बीच, पुलिस ने सफदरजंग मकबरे (Safdarjang Tomb) के बाहर डेरा जमाए बैठे हजारों प्रदर्शनकारियों को वापस विश्वविद्यालय चले जाने को कहा.

वहीं प्रदर्शनकारी छात्रों और शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन पर लाठियां चलाईं और यहां से चले जाने के लिये मजबूर किया. पुलिस ने जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष (JNU students’ Union President Aishe Ghosh) समेत हिरासत में लिये गए करीब 100 छात्रों को शाम के समय छोड़ दिया.

तो वहीं पुलिस अधिकारियों ने कहा कि प्रदर्शनकारी एम्स (AIIMS) और सफदरजंग अस्पताल (Safdarjang Hospital) की एंबुलेंस के रास्तों को रोक रहे थे. हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि “लाठीचार्ज” के सभी आरोपों की जांच की जाएगी.

जेएनयू शिक्षक एसोसिएशन (JNUTA) ने विश्वविद्यालय के बाहर पुलिस की तैनाती पर चिंता व्यक्त की.

“इस तरह के बल का उपयोग संवैधानिक रूप से लोकतांत्रिक अधिकारों को विफल करने के लिए, और छात्रों को शांतिपूर्वक कैंपस से बाहर उनकी आवाज उठाने से रोकने के लिए किया गया. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और हमें उम्मीद है कि अंततः ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न नहीं होगी,” एसोसिएशन ने कहा।

बंद करनी पड़ी मेट्रो सेवाएँ !

संसद के पास दिल्ली के पांच मेट्रो स्टेशनों, जोर बाग, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, उद्योग भवन और लोक कल्याण मार्ग के प्रवेश और निकास बिंदु को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था, अधिकारियों ने बताया. हालाँकि दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने शाम को मेट्रो सेवाओं को फिर शुरू कर दिया था.

पिछले तीन सप्ताह से विश्वविद्यालय के परिसर में धरना दे रहे छात्रों ने अपनी मांगों के बारे में संसद का ध्यान आकर्षित करने के लिए सड़कों पर उतरकर यह दावा किया कि जब तक सरकार बढ़ोतरी को वापस नहीं लेती. हालाँकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बुधवार को फीस बढ़ोतरी की आंशिक वापसी की घोषणा की थी जिसे यूनियन ने एक बहाना बताया.