थाइलैंड: आसियान सम्मेलन (ASEAN Summit) के अंतर्गत होने वाले आरसीपीई (RCEP) समिट में भारत ने शामिल होने से इनकार कर दिया है, भारत ने यह फैसला घरेलू उद्घोगों के हित के लिए किया है. प्रधानमंत्री नरेँद्र मोंदी ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (Regional Comprehensive Economic Partnership) शिखर सम्मेलन के अपने भाषण में कहा कि आऱसीईपी समझौते के मौजूदा स्वरूप में अपने मार्गदर्शक सिंद्धांत और आधारभूत भावना पूरी तरह से दिखाई नही देती.

उन्होने कहा कि यह समझौता भारत के बकाया मुद्दों और चिंताओं का संतोषजनक रूप से समाधान नही करता. इस स्थिति में भारत का क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी में शामिल होना संभव नही है. बाद में विदेश मंत्रालय की सचिव सुश्री विजय ठाकुर (पूर्व) ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश के मुख्य मुद्दों से कोई समझौता नही किया जाएगा यह निर्णय राष्ट्र हित के लिए किया गया है.

क्या है आरसीईपी सम्मेलन ?

रीजनल कंप्रेहेसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप यानि क्षेत्रीय व्यापाक आर्थिक समझौता शिखर सम्मेलन जो कि थाइलैंड में हो रही है इसमे आसियान के 10 देशों के अलावा 6 अन्य देश भाग ले रहे हैं. आसियान में शामिल 10 देशों में इंडोनेशिया , मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया शामिल है. आसियान सदस्यों के अलावा भारत,चीन,साउथ कोरिया,ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं. रीजनल कंप्रेहेसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप एक तरह का ट्रेड अग्रीमेंट है जो सदस्य देशों को एक दूसरे के साथ व्यापार में सहुलियत प्रदान करता है अग्रीमेंट के तहत सदस्य देशों को आयात और निर्यात पर लगने वाले टैक्स पर विशेष छूट दी जाती है.

क्या होता अगर भारत समझौते पर दस्तखत कर देता ?

आसियान सदस्यों के अलावा भारत,चीन,साउथ कोरिया,ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं. जिनमें भारत का व्यापर घाटा ज्यादातर इन्ही देशों के साथ है जिनसे हम निर्यात कम और आयात ज्यादा करते है अगर भारत समझौते पर दस्तखत कर देता तो घरेलू उद्धोग की पूरी तरह से कमर टूट जाती.

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि आरसीईपी में शामिल न होने के भारत के निर्णय में प्रधानमंत्री मोदी का दृढ़ नेतृत्‍व और देश के हितों की हर स्थिति में सुरक्षा का अदम्‍य निर्णय दिखाई देता है। एक ट्वीट में शाह ने कहा कि उनके इस निर्णय से भारत के किसानों, एम एस एम ई क्षेत्र, डेरी, विनिर्माण, फार्मास्‍युटिकल, इस्‍पात और रसायनिक उद्योग क्षेत्र को सहयोग मिलेगा.