शीर्ष अदालत की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने न्यायमूर्ति रंजन गोगोई पर कथित छेड़छाड़ की दो घटनाओं का गंभीर आरोप लगाया है.

खबरों के अनुसार इस महिला ने आरोप लगाया कि उनकी पहल को ठुकराने के बाद ही उसे सेवा से निकाल दिया गया. उसके पति और एक अन्य रिश्तेदार, जो पुलिस में हेड कांस्टेबल थे, को 2012 में एक आपराधिक मामले के सिलिसले में निलंबित कर दिया गया जबकि यह मामला परस्पर सहमति से सुलझा लिया गया था.

महिला का आरोप है कि उसे न्यायमूर्ति गोगोई की पत्नी के समक्ष दंडवत होने और उनके कदमों में नाक रगड़ने के लिये मजबूर किया गया. उसका यह भी आरोप है कि उसके दिव्यांग रिश्तेदार को भी उच्चतम न्यायालय में नौकरी से हटा दिया गया.

पति और अन्य रिश्तेदारों के साथ थाने में हिरासत में रखा गया और धोखाधड़ी के एक मामले में उसे शारीरिक प्रताड़ना और गालियां भी दी , महिला ने आरोप लगाया है.

खुद गोगोई, न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की विशेष पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।

अपने खिलाफ यौन उत्‍पीड़न के आरोपों को अविश्‍वसनीय बताते हुए न्‍यायमूर्ति गोगोई ने कहा कि इसके पीछे एक बड़ा षड्यंत्र है और वे आरोपों से इनकार करने की धृष्‍टता नहीं करेंगे.

प्रधान न्‍यायाधीश ने कहा कि यह मामला ऐसे समय आया है जब देश में लोकसभा के चुनाव हो रहे हैं और अगले सप्‍ताह उनकी अध्‍यक्षता में न्‍यायालय की एक पीठ कई संवेदनशील मुद्दों पर विचार करने वाली है.

मामले की सुनवाई कर रही पीठ की अध्‍यक्ष्‍ाता प्रधान न्‍यायाधीश कर रहे थे, लेकिन उन्‍होंने इस मामले का फैसला न्‍यायमूर्ति मिश्रा पर छोड़ दिया.

आदेश सुनाते हुए न्‍यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि मामले पर विचार करने के बाद पीठ फिलहाल कोई आदेश पारित नहीं कर रही है और यह बात मीडिया के विवेक पर छोड़ रही है कि वह उनसे की जाने वाली अपेक्षाओं के अनुसार संयम बरते और जिम्‍मेदारी से कार्य करे.

शीर्ष न्यायालय ने इस मामले में संयम बरतने और जिम्मेदारी से काम करने का मुद्दा मीडिया के विवेक पर छोड़ दिया ताकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं हो।

‘‘ मैं इसी कुर्सी पर बैठुंगा और बगैर किसी भय के अपने न्यायिक कर्तव्यों का निर्वहन करूंगा। मैं सात महीने में मुकदमों का फैसला करूंगा। मैं ऐसा करूंगा।’’ आरोपों से बेहद आहत न्यायमूर्ति गोगोई ने चेतावनी भरे लहजे में कहा.

उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला के हलफनामे की प्रतियां उच्चतम न्यायालय के 22 न्यायाधीशों के आवास पर भेजे जाने के बाद शनिवार को इसके सार्वजनिक होने पर न्यायमूर्ति गोगोई की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेष पीठ गठित की गयी।

उच्चतम न्यायालय के सेक्रेटरी जनरल संजीव सुधाकर कालगांवकर ने कई न्यायाधीशों को इस महिला का पत्र मिलने की पुष्टि करते हुये कहा कि इस महिला द्वारा लगाये गये सभी आरोप बेबुनियाद और निराधार हैं।

बार काउंसिल आफ इंडिया (BCI) ने शनिवार को रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के ‘‘गढ़े और झूठे’’ आरोपों की निंदा की. और कहा कि बार काउंसिल ‘‘संस्थान की छवि धूमिल करने’’ के इस प्रयास के खिलाफ खड़ा है।