Najeeb: एक माँ की अगर दुआ नहीं ले सकते, तो कम से कम उसकी बद्दुआ भी नहीं लेनी चाहिये! ये सरकार के आगे मजबूर माँ ने तो अपने सीने पर पत्थर रख सब्र कर लिया है. मगर ऊपर वाले के यहाँ देर है अंधेर नहीं.

जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ जेएनयू छात्र नजीब अहमद (Najeeb Ahmad) की माँ की. 15 अक्टूबर वर्ष 2016 को लापता हुए जेएनयू (JNU) छात्र नजीब अहमद को लापता हुए आज तीन साल हो गये है.

najeeb mother press conference

आपको याद ही होगा, 14 अक्टूबर 2016 को उसके और एबीवीपी (ABVP) के कुछ सदस्यों के बीच कथित तौर पर झगड़ा हुआ था. जिसके बाद से नजीब (Najeeb) अभी तक गायब है.

अगर पुलिस चाह भर ले तो एक छोटे बच्चे का खिलौना तक नहीं गुम हो सकता है, मगर यहाँ तो एक माँ का बच्चा गुम हुए पूरे तीन-साल हो गये हैं. गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने पहुँची उस बेबस माँ की रिपोर्ट तक दर्ज की नहीं गयी. हालाँकि बाद में मामले के तूल पकड़ने के बाद रिपोर्ट दर्ज की गयी.

गायब होने की एफआईआर (FIR) दर्ज होने से अब तक देश की तीन बड़ी जाँच एजेंसियां, दिल्ली पुलिस, एसआईटी (SIT) और सीबीआई (CBI) उसकी तलाश कर चुकी हैं.

najeeb mother

दर-दर धक्के खाने के बाद, कई बार विरोध प्रदर्शन करने के बाद कोर्ट ने केस देश की प्रीमियर जांच एजेंसी सीबीआइ को सौंपा. मगर पाताल से भी अपराधियों को ढूँढ कर लाने वाली सीबीआइ ने भी अपने घुटने टेक दिये. और कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल दी.

हाल ही में मैंने ख़बर पढ़ी की मोदी जी की भतीजी का पर्स चोरी हो गया था. और चोरी करने वालों को पुलिस ने 24- घंटों के अंदर ढूँढ निकाला.

700 पुलिस वाले इस VVIP केस को सुलझाने में लग गये. और इतनी शिद्दत से लगे की 200 से ज़्यादा सीसी टीवी कैमरे खंगाल डालें. 24- घण्टे के अंदर ही तीनो चोर पकड़े गये.

ऐसी चुस्ती-फ़ूर्ती अगर नजीब (Najeeb) को ढ़ूँदने में लगाई होती तो एक सिस्टम से हारी, बेबस माँ जो लगातार पिछले तीन सालों से इस गूँगी-बहरी सरकार को ये बताने की जीतोड़ कोशिश किये जा रही है कि उसका लाल कहीं खो गया है!

Najeeb Mother

इस बूढ़ी उम्र में जब वह अपने बेटे का हाथ पकड़ उसका सहारा चाह रही थी, तो इस सिस्टम ने उसको ही दर-बदर कर डाला. अपने बेटे की बस एक झलक पाने के लिये ये माँ आये-दिन विरोध प्रदर्शन करती है.

आज यानी 15 अक्टूबर को ये माँ एक बार फिर इस गूँगी-बहरी सरकार को ये बताने की कोशिश कर रही है कि उसके जिगर का टुकड़ा, इस बुढ़ापे में उसके आँखो का नूर कहीं किसी अंधेरे में खो गया है.

मगर क्या करे, एक माँ का दर्द सरकारें नहीं सुना करतीं!!!!

Najeeb Mother

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